Sunday, September 9, 2012


बाळ महोत्सव २०१२
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राज्य स्तरीय ९ वां बाळ महोत्सव ' यवनिका' के सस्थापक,प्रथम अध्यक्ष तथा मुख्य संरक्षक बक्सी सुधीर प्रसाद को श्रनधांजलि है.इस बार बाळ महोत्सव ५,६,७ नवम्बर को तथा फिनाल २१,२२,२३ दिसम्बर १२ को होना निश्चित किया गया है.

Friday, February 12, 2010

सलीम ख़ान के पत्रकार भाई समीउद्दीन नीलू (यू पी पुलिस द्वारा उत्पीड़ित) को मानवअधिकार आयोग से राहत, यू पी सरकार को ५ लाख मुआवजा देने का निर्देश

बचपन से सुना करते थे कि ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं ! लेकिन देश के मौजूदा सड़े हुए तंत्र में जिस तरह से आम जनता का भरोसा उठ गया है वह भी एक गंभीर समस्या ही है. समीउद्दीन नीलू उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले में विगत एक दशक से ज़्यादा समय से हिंदी दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला में बतौर संवाददाता अपनी सेवा कर रहें हैं. शीर्षकान्तर न हो इसलिए मैं यह बताना चाहूँगा कि कैसे मेरे भाई को यूपी की बल्कि लखीमपुर-खीरी की एस पी 'पद्मजा' ने अपने सरकारी पॉवर का दुरुपयोग करते हुए मानवता के क्रूरतम, तंत्र के दुष्टतम कृत्य को मात्र अपने गलत व समाज विरोधी कार्यों को छिपने के उद्देश्य से, जान से मारने की कोशिश (एनकाउन्टर) की और अपने नीचे कार्य करने आले पुलिस वालों की सहायता के ज़रिये उन्हें वन्य जीव अधिनियम के केस में फ़र्ज़ी तरीक़े से जेल भिजवा दिया.

लेकिन कहते हैं कि सांच को आंच नहीं, बस कुछ ऐसा ही हुआ. लखनऊ मंडल और बरेली मंडल में वकीलों, किसानों, मजदूरों, पत्रकारों और हाकरों द्वारा किये गए जन-आन्दोलन के चलते प्रशासन के बालों में जूं रेंगी और उन्हें लगभग 9 दिन जेल में रहने के बाद राहत नसीब हुई. मैं जब उनसे मिलने जेल गया था (मैं जेल ही पहली मर्तबा गया था) वहां कैदियों की हालत देख मेरे तो रोये खडे हो गए. अपने भाई को जेल में इस तरह बंद देख मैं खूब रोया. मेरे सबसे छोटे चाचा जो कि पीलीभीत बार एसोशियेशन के अध्यक्ष है अपने सहयोगी वकीलों के साथ उन्हें देखने आये. इस तरह से उन्हें लगभग 9 दिनों के बाद प्रशासन ने जेल से रिहा करने के निर्देश दे दिए. मामला विधान सभा और विधानं परिषद् में भी उठा....
सम्बंधित खबर यहाँ पढ़ें...

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Sunday, December 27, 2009

भोजपुरी गाना के महामारी

आज के ही बात बा ...... यवनिका संस्था में एगोबड़ा ही अच्छा कलाकार बाड़ें -अमर पाठक .स्वभाव आ बात-चित में भी अच्छा --गायक हवें -शास्त्रीय आ लोकगीत गावेलन। संस्कारी होखे के चलते गायकी में भी एगो संस्कार नज़र आवे ला ......बाकि समय के ईहो मरल हवन। फटाफट नाम-दाम कमायके फेरा में ई भी अश्लील भोजपुरी गायकी की ओरतेज़ी से बढ़ रहल बाडन
समझावे के कोशिश जारी बा ,लेकिन सस्तऊवा गाना गईलाके परिणाम आदमी जानत बा ,येही सब गाना के श्रोता भी बाडन ,बाज़ार भी बा ,एहसे आपनभोजपुरी गीतन के बचा रहल बानी जा । अमर जैसन कतनानया कलाकार पैसाके फेरा में कुछुओ गावे प तैयार बाड़ें .कहीं भी परिवार के साथै यात्रा ना कर सके ,सब तरफ अश्लील गाना ही सुनातरहे ला .अब त बिआह -शादी में भी गन्दा गाना ही सुनात रहल बा ,लोग ओही प परिवार के साथै नाचत -झूमत बाड़ें .........सबके आगे आवे के चाहीं .... आपन भोजपुरी ...आपन संस्कृति के बचावे के चाहीं ...

Saturday, November 21, 2009

नींद में पढ़ाईं ----विजय प्रकाश

ई बिसेस बात बा लेकिन हम एकरा के हिन्दी में रख रहल बानी------------ २० सितम्बर २००९ को जैन स्कूल,आरा में bal महोत्सव का पहला चरण शुरू हुआ जिसमे सामान्य ज्ञान,कहानी लेखन ,चित्र कला तथा कार्टून की प्रतियोगिताएं थी।इस चरण में लगभग पुरे बिहार से ३५०० बच्चों ने भाग लिया .इस माहौल को देखकर बिहार के प्रधान सचिव श्री विजय प्रकाश बहुत ही प्रभावित हुए। विशिष्ट अतिथि डॉ मृदुला प्रकाश खुशी से झूम उठी थी ,वे अपनी भावनाओं को बड़ी ही मुश्किल से संभल पायीं.आई ए एस मिप्रकाश ने बच्चों ,शिक्षकों,माता-पिताओं को बताया की अपने बच्चों को सपनों में पढ़ाएं .यदि विज्ञानं ए मैथ का कोई प्रश्न हल नही हो रहा हो तो उसे बनते-बनते सो जाओ ,सुबह उठोगे तो तुम उस समस्या को ख़ुद ही हल कर लोगे क्योंकि दिमाग रात भर जगा रहता है औरअपना कामकरता रहता है। यह गप नहीं सच है.बेंजीन की संरचना के आविष्कारक को संरचना की जानकारी सपने में ही मिली थी.वे बेंजीन के बारे में सोचते -सोचते सो गए । सपना देखा की एक सांप अपनी पूंछ अपने मुंह में दबाये हुए है .जगाने पर उन्हें यह अजीब लगा ,उन्होंने सोचना शुरू कर दियाऔर निष्कर्ष निकला की यही बेंजीन की संरचना है जिसकी शुरुआत और अंत एक ही जगह पर होता है .श्री प्रकाश के अनुसार यदि बच्चा सो गया है तो ज्ञान की बातें बताते रहे ,एक महीने बाद पाएंगे की वो बच्चा उस विषय में निपुण हो गया है .
पढ़ाला के बाद अपन विचार जरुर दिहिन सबे ---- बड़ा ही उम्मीद बा ....

Thursday, July 9, 2009

विधान पार्षद के चुनाव में बाहुबली के भरमार

आरा-बक्सर विधान परिषद् के चुनाव में मय बाहुबलिए उतरन बाडन। भोटभले ही जन -प्रतिनिधि दिहन बाकि बवाल त होईबे करी.भाजपा-जद यू के उम्मीदवार विशेश्वर बाहुबलीओझा जे अभी बेल पर जेल से बाहर बाडन, त राजद उम्मीदवार दारू माफिया लाल दास राय बाडन .सबपर भारी फरारी कुख्यात अपराधी तथा बाहुबली विधायक सुनील पांडे के भाई हुलास पाण्डेय बाडन । भोट के रेट खुला बा -रु० ५००००-७५००० के दर से बाज़ार भावः बा , अब त जईसे-जईसे भोट देवे के समां नागिचा ता ओईसे-ओईसे रेट भागल जा ता । हो सकेला की एगो-दुगो मर्डर भी हो जाय
"जेकर लाठी ओकर भईंस "ई बात जरुर नज़र आई एह चुनाब में .कोई पईसाके बल पर चुनाव लड़ता त कोई पईसा आ पावर दुनो के बल पर. ईहे त खास बात बा ई भोजपुरियन पठ्ठा में ,अब ताल ठोक के ना ..... बल्कि बनुक में गोली आ जेबी में पईसा भर के चुनावी मैदान में बाडन जा । एह चुनाव में सुने में अव ता की लगभग पांच करोड़ लागल बा ,अब त समय ही बताई की ऊँट केने करवट लेता .....

Monday, June 1, 2009

अख़बार "अमन के सिपाही" में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख छपा

(अख़बार "अमन के सिपाही" में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख छपा)

कैराना के 'अमन के सिपाही' में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख "अल्लाह गणित नहीं जानता है" 30 मई 2009 को छपा.
लेख छापने के लिए मैं 'अमन के सिपाही' संपादक महोदय का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.  

सलीम खान 
संरक्षक  
स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ 
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

Wednesday, April 29, 2009

'भड़ास फॉर यूपी' के व्यवस्थापक पद हेतु आवेदन

प्रिय पाठकों और सदस्यों ! मैं (सलीम खान) बड़े खेद के साथ यह सुचना देना चाहता हूँ की इस ब्लॉग (भड़ास फॉर यूपी) को मैं समयाभाव के कारण उचित ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ. यह ब्लॉग यूँ ही सुचारू रूप से चले इसके लिए मैं आप सभी से यह कहना चाहता हूँ कि अगर आपको लगता है कि आप इस मंच को ठीक उसी तरह से सेवा कर सकेंगे जैसा कि मैं करता आया हूँ तो आप मुझे swachchhsandesh@gmail.com पर अपने बायोडाटा के साथ मेल कर दें | आप यह ज़रूर बताएं कि आप अंतरजाल पर रोज़ कितना समय देते है और आपका प्रोफेशन क्या है| 

अपनी एक पासपोर्ट साइज़ फोटो और मोबाइल नंबर को मेल करते वक़्त देना ना भूलें |  

आपकी मेल के मिलने के एक सप्ताह के भीतर चयन होने की सुचना दे दी जायेगी| हालाँकि भड़ास फॉर यूपी पर एकल व्यवस्थापक की ही आवश्यकता है, परन्तु अगर एक से अधिक उम्मीदवार चयनित हो जाते है तो व्यवस्थापक मंडल का निर्माण किया जायेगा जिसके लिए नियम व शर्तें लागु होंगी और इस ब्लॉग पर शीग्र ही प्रकाशित की जायेंगी |  

आपका  
सलीम खान

Tuesday, February 24, 2009

बियाह के नियम - रवा कतना जानत बानी......?

भोजपुरी क्षेत्र में लगन-बियाह के बड़ा महत्व हो ला ,आजकल लगन चरचारायील बा.लोग देस-परदेस से एह घरी आपन -आपन घरे दुआरे आ रहल बा लोग .बिआह होता ,आगहूँ होईबे करी....... । लोग बिआह त कर रहल बाडन, आ कतना लोगन के हो रहल बा ....लेकिन हम जानल चाहत बानी की बिआह जब होला त कुछ रीती -रिवाज़ होला ,ई सब के अर्थ का सभे कोई जानत बा॥ .......... फ़िर भी हम बता देत बानी ... की भोजपुरी क्षेत्र में बिआह जब होला तब कैसे होला-----
कन्या -दुलहा (दुलहा-दुल्हिन)सबसे पहीले माडो में बैठे ला लोग, जहाँ ई लोग बैठे ला लोग ओहिजा ज़मीं पर जौ बिछावल जाला, की ई कच्छप नारायण हवन , तवाना के ऊपर घडा में पानी भर के रखा ला की उ क्षीर सागर हवन ,क्षीर सागर में विष्णु भगवान रहे लन एह से ओकरा में कसैली डाला ला ,आ... विष्णु भगवान के साथै त लक्ष्मी जी रहेनी ,एह से ओकरा में पैसा डाला ला... । विष्णु भगवन के नाभि से कमल के फूल निकलल बा एह से ओकरा में आम के पल्लो डाला ला । तवाना के ऊपर चार मुहँ वाला दिया धारा ला की ऊ ब्रह्मा जी हवें । त कहे के मतलब ई बा की जवान बिआह होला ओकरा में इतना भगवान लोग साक्षी रहे ला ,तब जा के बिआह होला .लेकिन बहुत ही कम लोग एह सब के अर्थ जाने ला । त ... हम आपन भोजपुरियन लोगन से जानल चाहत बानी की कातना लोग हमनी के ई परम्परा से परिचित बा । जय भोजपुरी ,जय भारत ..... ॥

Friday, February 6, 2009

जन्म दिन का गिफ्ट -बसंत में प्यार ही प्यार

हमार जन्म त बसंत ऋतू में भईल रहे ,एह से लागता की ई बसंत बाएं न जाई । एगो हमनी देने लोकगीत बड़ा ही फेमस बा- गम -गम ,गम के गांव सुनहरा,आ मति कहे पुकार
दिल्ली वाली दुल्हिन ,चल के देख गऊँवा हमार
कहे के मतलब बा की हो सकता इही बसंत में कवनो दिल्ली के लईकी से मन अझुरा जाए आ ओंकारा के बिहार के दुल्हिन बना के लिया लिआवे। हमहूँ त दिल्ली ऐ में कम -धाम करत बानीपेशा से गवानिया हईं,कबहूँ -कबहूँ नाच हूँ लिही ले। नुकड़ नाटक त जम के करीला ,रौऊवा सभे ध्यान देब जा।
एहेहीईईईईईई हमार जन्मदिन के गिफ्ट रही। जे हमारहित-नाता ,दोस्त-संघतिया बा हमारा बाड़े में कुछ विचार करे ----- आजकल मिजाज गड़बडी रहता

Wednesday, January 28, 2009

बेहाल बानी अंतर्राष्ट्रीय गणितज्ञ वशिष्ठ


कबहू विश्व के आचाम्भा में डाले वाला ,कम्पुटर से भी तेज़ गणन करे वाला विश्व विख्यात वशिष्ठ आज गाँव के अन्हरिया में रहे खातिर मजबूर बडें सब लोगन के आवे के चाहीं। चार दिन पहिले आरा ,बिहार के आई स्पेशलिष्ट डा कन्हैया सिंह वशिष्ठ जी के आँख के ऑपरेशन कर के मोतैबिंद ठीक कैली हा । अब उहाँ के सब लुके लागल .सिज्रोफेनिया बीमारी से ग्रसित महानगणितज्ञ के आज पूछे वाला न सरकार बा न जनता और न ही प्रशसन । भगवान भरोसे चल रहल बनी डाक्टर साहेब .लालू के जब बिहार में सरकार रहे तब ऊ एक हाली आपण मंत्री के साथ इलाज़ करावे खातिर एम्स ,डेल्ही भेजल गेल रहन ,ओकरा बाद उहाँ के कांके रांची में देखावल गइलअस्पताल के फीस जमा कैला के चलते उहाँ के अस्पताल में बन्धकी बना लेल गइल। मिडिया के हाला-गुल्ला कैला के चलते सरकार पैसा जमा कर के छोड़ा लेलस। कहानी बड़ा ही लंबा बा ------


ओंकारा नाम पर पञ्च आदमी के लालू सरकार ऊंह के देखे खातिर नौकरी देलस ,लेकिन उनकर घरवाला के छोड़ के कोई पूछ्हूँ वाला कोई नइखे।

अब हूँ आगे भी जरी रही -----


(फोटो -साइंस कॉलेज,पटना के प्राचार्य के साथ युवा वशिष्ठ )

Friday, January 23, 2009

सुनहूँ तात बात हमारी


एगो बात कहल चाहत बानींखासकर ओकरा से जे भोजपुरी भाषा से जुडल बा .हम हमेशा देखत रहनी की चटपट बात के बड़ा ही चटकारा ले के पढ़ ल जा ला। बाकि ऐ भाई ,कओनोगंभीर बात पर सभेकेहू तिरछे राह नाप ले ता। स्कूली लइकन खातिर ''आइना" पत्रिका अर से निकल रहल बा.जेकरा से सबके जुड़े के चाही, बच्चा लोग के आशीर्वाद देवे के चाही बाकि ब्लॉग प् आईला के बडो केहू न ध्यान देलस। का भाई ऐ का हाल बा। अरे एगो अच्छा काम होता ता ओकरा के बढ़ावा दिहल जला। खास तौर पर आपण जवार भाई से ता अइसने उम्मीद रहे ला । देखि सभे ' आइना' पत्रिका अपना आप में अनोखा बा एह से की एकरा में बच्चा लोग ही रचनाकार, पत्रकार, रिपोर्टर, कवि, पेंटर बाडन। मने की अपन अभी तक के छवि से अलग बच्चा लोग ऐ पत्रिका में समाज के एगो नया दिशा देवे के कोसिस करातरण। ता ई कोसिस में रउवा सभे के भी सहभागिता चाही, अंत में गोर लागतानी। राम राम,

Tuesday, January 20, 2009

बाल पत्रिका आईना ,सब लोगन खातिर

आईना jअइसन पत्रिका बच्चा सब के हा ई बहुत बरबात बा। हम तकहब की आरा जैसन शहर से इतना बाद प्रयास खातिर सब बिहारी भाई लोगन के आगे आवे के चाहीं । बस ईहे करे के बा की बल पत्रिका आईना एक धरोहर बन के रहे जेकरा फायदा सभे केहू उठावे,सबके औलाद एकरा में लिखे .हम त सब लोगन से गुजारिस करब की सभे कोई आगे आवे .

Sunday, October 26, 2008

सुभकामना

सब केहू के दिवाली आ छठ के खूब बधाई । लछमी जी, गणेश जी , छठी मैया आ उदित भगवान सबके सुख, शान्ति आ समृद्धि देस ।

Friday, October 3, 2008

काहे बदलल बा संसार

दुनिया झुक गइल एहिजा, देख कइसन बा भीड़-भाड़
खाना खाए खातिर भ इ ल बाटे एहिजा बड़ी मार
बल वाला लुटता सबके इहे ह संसार
काहे बदलल बा संसार ।

Tuesday, September 30, 2008

ईद आउर नवरात्री दशहरा के रउआ सभे के शुभकामना





ईद एवं नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं । सभी सुधि पाठक एवं ब्लॉगर भाइयों के घर शान्ति, शक्ति, सम्पति स्वरुप, सयम सादगी, सफलता, समृधि, संस्कार, सम्मान, स्वस्थ्य सरसवती आप सब के साथ हो। एक बार फ़िर नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें।

Thursday, September 25, 2008

मीडिया कर्मियों का पहल -हम भी कुछ हैं..

बिहार के अर में पत्रकारों ने मिलकर इतिहास रचाने की कोशिश में लगे हुए हैं । पिछले पञ्च वेर्शों से ये लोग भोजपुर बाल महोत्सव का आयोजन अर में कर रहें हैं जिसमें शहर तथा सुदूर ग्रामीण इलाके के बच्चें इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेते रहें हैं .इस आयोजन ने अर जैसे naksalvad से grasit ilaka में bhuchal la दिया है .इस में हर वर्ष lagabhag ७००० bachche भाग लेते हैं । yawanika sanstha dvara ayojitnatak ,dance, गायन, painting,cartoon,fancy dress ,kahani-कविता lekhan,कविता pathaadi pratiyogitayen isame shamil किया jata है.यह sat divsiy कार्यक्रम है जिसमे zila prashasan सहित आरा के nagrik भी पुरी तरह से जुड़े rahate हैं। लिखात ना रहे ,आज्ज मौका भी मिलल औउर तकनिकी समस्या भी ख़तम हो गईल बा । भोजपुरी क्षेत्र के भोजपुर जिला के ख़बर बाद ही निक मिलल बा । आरा में एगों संस्था यवनिका बा जे ओहिजा बाल महोत्सव करा रहल बा .एह में नाच ,गाना, पेंटिंग, कार्टून्स,भाषण ,कहानी लेखन -कविता लेखन ,fancy ड्रेस ,नाटक, एकल अभिनय,सामान्य ज्ञान, कविता पाठ या रैम्स सहित १२ कार्यक्रम बा। ई सब स्कूल के बच्चन खातिर हो रहल बा .जानकारी इहो मिलल बा की एकरा में लगभग ५००० लैका -लैकि भाग लिहां स ओक्टूबर से नोवेमबर तक ई कार्यक्रम बा .एकरा के लगभग दू लाख लोग देखे ला जवान सात दिन के हो ला । गों शहर सगरो के बाल -बच्चा भाग लेवे ला। बड़ से छोट तक के बच्चा एके मंच प् आपण कला के देखावे ला । एकरा के आयोजित करे में कुछ पत्रकार लोगन के मुख्या भूमिका बा जे देल्हीमीडिया से जुडल बा लोग ,आ अबही ई पुरा टीम आरा में पहुँच के यागिक आयोजन में भीड़ गइल बा लोगन .जानकारी खातिर की आरा माले -रणवीर सेना के खुनी लडाई खातिर विश्व विख्यात रहल बा ,आ ओहिजा ई तरह के कार्यक्रम यवनिका संस्था पिछला पाँच वेर्ष से करा रहल बा । बच्चन लोगन खातिर ई तरह के विश्व में एक मात्र मंच बा जहाँ एक साथ इतना कार्य क्रम हो रह बा। ई आयोजन में जिला प्रशासन भी आपण पुरा योगदान दे रहल बा .एह से ई आयोजन दिन प्रतिदिन मील के पत्थर बनल जा रहल बा.

Wednesday, September 24, 2008

मील के पत्थर

बड़ा दिन से कुछ लिखात ना रहे ,आज्ज मौका भी मिलल औउर तकनिकी समस्या भी ख़तम हो गईल बा । भोजपुरी क्षेत्र के भोजपुर जिला के ख़बर बाद ही निक मिलल बा । आरा में एगों संस्था यवनिका बा जे ओहिजा बाल महोत्सव करा रहल बा .एह में नाच ,गाना, पेंटिंग, कार्टून्स,भाषण ,कहानी लेखन -कविता लेखन ,fancy ड्रेस ,नाटक, एकल अभिनय,सामान्य ज्ञान, कविता पाठ या रैम्स सहित १२ कार्यक्रम बा। ई सब स्कूल के बच्चन खातिर हो रहल बा .जानकारी इहो मिलल बा की एकरा में लगभग ५००० लैका -लैकि भाग लिहां स ओक्टूबर से नोवेमबर तक ई कार्यक्रम बा .एकरा के लगभग दू लाख लोग देखे ला जवान सात दिन के हो ला । गों शहर सगरो के बाल -बच्चा भाग लेवे ला। बड़ से छोट तक के बच्चा एके मंच प् आपण कला के देखावे ला । एकरा के आयोजित करे में कुछ पत्रकार लोगन के मुख्या भूमिका बा जे देल्हीमीडिया से जुडल बा लोग ,आ अबही ई पुरा टीम आरा में पहुँच के यागिक आयोजन में भीड़ गइल बा लोगन .जानकारी खातिर की आरा माले -रणवीर सेना के खुनी लडाई खातिर विश्व विख्यात रहल बा ,आ ओहिजा ई तरह के कार्यक्रम यवनिका संस्था पिछला पाँच वेर्ष से करा रहल बा । बच्चन लोगन खातिर ई तरह के विश्व में एक मात्र मंच बा जहाँ एक साथ इतना कार्य क्रम हो रह बा। ई आयोजन में जिला प्रशासन भी आपण पुरा योगदान दे रहल बा .एह से ई आयोजन दिन प्रतिदिन मील के पत्थर बनल जा रहल बा.

Friday, September 5, 2008

बंडमरु के एगो परिचय सोहर के साथे

हमार नाम बंडमरु ना ह , हमार भइया हमरा के प्यार से एह नाम से पुकारेनी एह से हम आपन एही नाम से सगरो लिखेनी । हम भोजपुर के रहेवाला हइ एह से भोजपुरी से खास लगाव बा। हमनी के भोजपुरी में एगो कहाउत बा ...
ह भोजपुर के माटी, ना केहू आटल बा ना केहू आटी...
सबसे पहिले हम एह ब्लॉग के पढ़े वाला औरु भोजपुरिया भाई के प्रणाम कर के एह ब्लॉग प कुछुओ लिखल चाहत बनी। एह से हम शुरू करत बानी जनम से । अभी रउआ के भलही बकवास लगत होई लेकिन बाद में निक लगे लगी । !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
त हम शुरू करत बानी जनम से । भोजपुरी भाई लोग जानत होई की हमनी के घर में कौनो लइका या लइकी जनम ले ली सन त ओह खुशी के बेला में सोहर गावल जाला । सोहर के माने शोर हर जगह । ओकरे के सोहर कहल जाला । देखीं जा हम कोनो बिद्वान नैखी गलती हमरो से हो सकेला । रउआ सभे हमार गलती के क्षमा करब जा।

त पढ़ी जा सोहर .....................

कहवा से कृष्ण अइले भवन में समाई गइले हो ,
आहो सुनहु-सुनहु रुकुमिन बात राधिका गरियाव्ली हो ।
अतना वचन रुकुमिन सुनली सुनही ना पावेली हो , ऐ ललना ....

झापी में से काढेली पीताम्बर झारी के पहिन ली हो, ऐ ललना ...
आगा -पीछा लेली चार सखिया ओरहन देवे चलेली हो ।

अंगना बहरयित चेरिया अवरु ल उ डिया नु हो, ऐ ललना....
चेरिया झारी के बिछाव सतारंजिया त सवत पाव ढारस हो ।

तोहरा बोलवले नाही आइबी बैठावले नाही बइठब हो, ऐ राधिका ...
हमरा के काहे गरियावेलु अ रे इ या कही पुकारेलु हो ।

तू त हउ अहिरिन ग्वालिन गलिय-गली दही बेच हो, ऐ ललना ...
हम त हइ कृष्णा के बियाही त बोलिला बरोबर हो।

सोहर के मिठास के का बखानी । सुने वाला के मन सोरहो आना हो जाला । अगला रचना तक इंतजार करीं जा हम फ़िर आवत बानी.......
त पीटल जाओ हमनी के मिल के भोजपुरी के ढिढोरा ....... जय भोजपुर आ जय भोजपुरी ।

Thursday, September 4, 2008

छट्ठ पूजा के महिमा

भोजपुरी इलाका में छट्ठ पूजा के बड़ा ही महत्व बा। दीवाली के ठीक छठा दिन ही छठ पूजा होला।ई पूजा नहा खा से शुरू होखे ला। नहा खाए के दिन लौका आरवा चाउर के भात बनाकेदिन में खाइल जाला । दूसरा दिन बिना अन-पानी के दिनोभर छाथबरती लोगन भूखे ला लोग आ रातिखानी रोटी-खीर (गुड के )खाइल जाला । तीसरा दिन माने की पहिला अरग -पहिलका अरग के दिन छाठ्वर्ती लोगन बिना अन-जल के दिनोभर भूखे ला लोग आ शाम में नदी किनारे या तालाब किनारे नहा धोआ के डूबत सूरज भगवान के अरग देल जाला । एह घरी फल दऊरामें लेके घाट किनारे सब परिवार के साथै बैठल जाला,आदित्य बाबा से प्रार्थना कईल जाला। सूर्यास्त के साथ ही सभे या घर चल जाला लोग या फिर रात भर घाट किनारे बैठ के पूजा कईल जाला ।
दूसरा अरग-दूसरा अरग के दिन भक्त लोग सूर्योदय के जल ढ्हार के अरग देल जाला साथ में फल ,ठेकुआ, गुलौरा चर्हावल झाला। ओकरा बाद सभे कोई आदितबाबा के गोड़लग के भूखनिहार के गोड़ लाग के आशीर्वाद लिया ला। दौउरा लेके के घर जाइल जा ला.एकरा बाद भूखनिहार लोग परं करे ला ,मने की पापरा ,बजाका ,पियाजी हर तरह के चटक - मटक खाए -पिए के चीज़ रहेला।
ई पूजा के बड़ा ही महत्व बा, हर भोजपुरी या भारत के पूर्वांचल प्रदेश के लोगन के बीच ई परब न होके महा परब के रूप में मनावल जाला। अब त छट्ठ पूजा मुंबई,डेल्ही, कोल्कता जइसन महानगरो में खूब धूम-धाम से मनावल जाला। छट्ठ पूजा के महत्व अब त बिदेश में भी होखे लागल .

Wednesday, September 3, 2008

भोजपुरी भाई-बन्धु के नमस्कार,

रावा सभे भोजपुरी इलाका के बानी जा ,सबके भोजपुरी चौपाल में स्वागत बा। आपन विचार, आपना देने के संस्कृति,रीति-रिवाज़, लोक- खेल, कोई भी भोजपुरी इलाका के ख़बर , भोजपुरी संस्कृति ,भोजपुरीek भोजपुरी भोजपुरीawa भोजपुरी के साक्षात्कार ,रावa सभेjekara पास ढेर सारा चीज़ बा लेकिन उ गुमनामी में रहत बा, ओकरा के सामने लावे के प्रयास करिजा------. राव सभे के सहयोग व् साथ के जरुरत बा जेकरा से भोजपुरी भाषा , संस्कृति आदि के विकास हो सके ,देस-परदेस सभे कोई जाने- समझे।